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समाज के उच्च आदर्श, मान्यताएं, नैतिक मूल्य और परम्पराएँ कहीं लुप्त होती जा रही हैं। विश्व गुरु रहा वो भारत इंडिया के पीछे कहीं खो गया है। ढून्ढ कर लाने वाले को पुरुस्कार कुबेर का राज्य। (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/ अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र-तिलक संपादक युगदर्पण 09911111611, 9999777358.

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बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य

: : : क्या आप मानते हैं कि अपराध का महिमामंडन करते अश्लील, नकारात्मक 40 पृष्ठ के रद्दी समाचार; जिन्हे शीर्षक देख रद्दी में डाला जाता है। हमारी सोच, पठनीयता, चरित्र, चिंतन सहित भविष्य को नकारात्मकता देते हैं। फिर उसे केवल इसलिए लिया जाये, कि 40 पृष्ठ की रद्दी से क्रय मूल्य निकल आयेगा ? कभी इसका विचार किया है कि यह सब इस देश या हमारा अपना भविष्य रद्दी करता है? इसका एक ही विकल्प -सार्थक, सटीक, सुघड़, सुस्पष्ट व सकारात्मक राष्ट्रवादी मीडिया, YDMS, आइयें, इस के लिये संकल्प लें: शर्मनिरपेक्ष मैकालेवादी बिकाऊ मीडिया द्वारा समाज को भटकने से रोकें; जागते रहो, जगाते रहो।।: : नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक विकल्प का सार्थक संकल्प - (विविध विषयों के 28 ब्लाग, 5 चेनल व अन्य सूत्र) की एक वैश्विक पहचान है। आप चाहें तो आप भी बन सकते हैं, इसके समर्थक, योगदानकर्ता, प्रचारक,Be a member -Supporter, contributor, promotional Team, युगदर्पण मीडिया समूह संपादक - तिलक.धन्यवाद YDMS. 9911111611: :

Saturday, July 26, 2014

कारगिल विजय दिवस:

कारगिल विजय दिवस: 
Photo: कारगिल विजय दिवस: युद्ध के 15 साल पूरे होने के मौके पर आइए आज सेना के शहीदों को करें श्रद्धासुमन अर्पित। 

सरहद पर तैनात ऐसे भाइयों को जो देश के रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी आहुति देने के लिए सदा रहते है तैयार; इस रक्षा बनधन भेजें उन्हें राखी - http://goo.gl/m3J93Oकारगिल विजय दिवस: युद्ध के 15 वर्ष पूरे होने के पर, आइए आज सेना के शहीदों को करें श्रद्धासुमन अर्पित। 
देश के रक्षा के लिए, सीमा पर अपने प्राणों की भी आहुति देने के लिए सदा तत्पर सैनिकों को यह सन्देश भेज रहा है सारा देश, जैसे तुम देश का ध्यान रखते हो तुम्हारे परिवारों का वैसे ध्यान रखेगा देश; तो इस रक्षा बन्धन पर भेजें उन्हें भी राखी। - युग दर्पण 
यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था, आज भी इसमें वह गुण,
योग्यता व क्षमता विद्यमान है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक
विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया |
 इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक

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